समुद्र मंथन से प्रकट हुए अमृत कलश की पावन बूंदें जहां पतित-पावनी मां गंगा के जल में समाहित हुईं — वही दिव्य क्षेत्र हरिद्वार है। 6 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होने वाला हरिद्वार अर्ध कुंभ 2027 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि कोटि-कोटि सनातनियों की अगाध आस्था, ऋषि-परंपरा और अध्यात्म का सबसे भव्य महाउत्सव है।
कुंभ काल के दौरान गंगाजल साक्षात अमृतरस में परिवर्तित हो जाता है, जिससे स्नान मात्र से पुण्य लाभ होता है।
जूना, निरंजनी व महानिर्वाणी सहित 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वरों एवं नागा साधुओं का दिव्य शाही स्नान।
प्रत्येक 12 वर्ष में पूर्ण कुंभ एवं 6 वर्ष में अर्ध कुंभ का खगोलीय एवं आध्यात्मिक नक्षत्र योग बनता है।
विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मकुंड पर स्नान व गंगा जी की भव्य आरती का अलौकिक एवं आध्यात्मिक अनुभव।
अमृत स्नान चक्र
संत व संन्यासी परंपरा
अनुमानित श्रद्धालु
सुरक्षित परिवार गाइड
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सनातन धर्म में कुंभ पर्व केवल एक धार्मिक मेला नहीं, अपितु खगोलीय संगणना, ग्रह-नक्षत्रों के दुर्लभ योग और मानव चेतना के जागरण का परम पावन पर्व है।
देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। असुरों से अमृत की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी जब कलश ले जा रहे थे, तब पृथ्वी पर 4 पवित्र स्थानों में अमृत बूंदें गिरीं — जिनमें हरिद्वार (हर की पैड़ी) प्रमुख है।
देवताओं का 1 दिन मनुष्यों के 1 वर्ष के बराबर होता है। अमृत रक्षा में लगे 12 दिव्य दिनों के प्रतीक स्वरूप पृथ्वी पर प्रत्येक 12 वर्ष में पूर्ण महाकुंभ तथा 6 वर्ष के अंतराल में अर्ध कुंभ का योग बनता है। वर्ष 2027 में हरिद्वार में यही 6-वर्षीय पावन अर्ध कुंभ घटित हो रहा है।
आदिगुरु शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित 13 प्रमुख सन्यासी, बैरागी एवं उदासीन अखाड़ों के पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर तथा नागा साधु कुंभ में पधारते हैं। शाही स्नान के अवसर पर अखाड़ों की भव्य शोभायात्रा और गंगा स्नान सनातन संस्कृति की अटूट निष्ठा का दर्शन कराता है।
शास्त्रों में वर्णित है कि हज़ार अश्वमेध यज्ञ और सौ वाजपेय यज्ञ करने से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वह कुंभ काल में पतित-पावनी मां गंगा में एक श्रद्धापूर्वक डुबकी लगाने मात्र से सुलभ हो जाता है।
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उत्तर: हरिद्वार अर्ध कुंभ मेला जनवरी 2027 से अप्रैल 2027 तक हरिद्वार में गंगा तट पर आयोजित होगा। मुख्य शाही स्नान मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और महाशिवरात्रि पर होंगे।
उत्तर: नहीं, पवित्रपथ एक सूचना एवं तीर्थ सहायता प्लेटफॉर्म है। हमारा उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिना किसी महंगे बिचौलिए के सीधे सत्यापित धर्मशालाओं, गाइडों और आधिकारिक तिथियों की जानकारी देना है।
उत्तर: अति-भीड़ वाले शाही स्नान के दिनों के बजाय पर्व स्नान या सामान्य दिनों पर आना बुजुर्गों के लिए अधिक आरामदायक और सुरक्षित रहता है।